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चुड़ासमा-सरवैया-रायजादा
चूड़ासमा गिरीनगर (गिरनार) के नाम से प्रख्यात जूनागढ प्राचीनकाल से ही आनर्त प्रदेश का केन्द्र रहा है। उसी जूनागढ...
Himmat Singh 47
परमार (पंवार) वंश की उत्पति
इतिहास में परमार राजवंश अति प्रसिद्ध रहा है। परमार शब्द का अपभ्रंश होकर पंवार हो गया। इस वंश में राजा विक्रमादित्य व राज...
Himmat Singh 44
परमार वंश के वंशचिन्ह (गोत्र-प्रवरादि)
वंश – अग्निवंश गोत्र – वशिष्ठ प्रवर – वशिष्ठ, अत्रि ,साकृति वेद – यजुर्वेद उपवेद – धनुर्वेद शाखा – वाजसन...
Himmat Singh 45
मेड़तिया राठौड़
मेड़तिया राठौड़ राजपुताना इतिहास - राठौड़ो की सम्पूर्ण खापे - मेड़तिया राठौड़ मेड़तिया राठौड़ - मंडोर [जोधपुर] के श...
Himmat Singh 54
पंवार वंश की शाखाएँ
(1) चन्ना :-- यह परमारों की प्राचीन शाखा है। (2) मोरी :-- परमारों की प्राचीन शाखा किसी मोरी परमार के वंशज। सम्भवतः चि...
Himmat Singh 46
मालवा के राजा विक्रमादित्य एवं भोज परमार
मालवा के प्राचीन परमार शासक- मालवा पर परमारों का ईसा से पूर्व में शासन था। हरनामसिंह चौहान के अनुसार परमार मौर्यवंश की श...
Himmat Singh 36
राजपुताना के पंवार (परमार) राज्य
नो कोटी मारवाड़ :-- पांचवीं-छठी शताब्दी में पश्चिमी राजस्थान आबू, बाड़मेर, लोद्रवा, पूंगल आदि पर भी परमारों का राज्य था।...
Himmat Singh 41
सांखला व सोढा
सांखला पंवारों की एक शाखा है। वि.सं. 1381 के प्राप्त शिलालेख में शंखकुल शब्द का प्रयोग किया गया है। धरणीवराह पुराने किरा...
Himmat Singh 204
सांखला व सोढा
सांखला पंवारों की एक शाखा है। वि.सं. 1381 के प्राप्त शिलालेख में शंखकुल शब्द का प्रयोग किया गया है। धरणीवराह पुराने किरा...
Himmat Singh 119
मेजर शैतान सिंह भाटी: रेज़ांग ला के अमर वीर
मेजर शैतान सिंह भाटी: रेज़ांग ला के अमर वीर भारत माता के सच्चे सपूत मेजर शैतान सिंह भाटी का नाम देश के इतिहास में स्व...
Himmat Singh 28
राजपूत समाज की कुलदेवियां
राजपूत युग की वीरता व पराक्रम का भारतीय इतिहास में अद्वितीय स्थान है। क्षत्रियों का कार्य समाज की रक्षा करना था। कालांतर...
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डूंगरसिंह (Dungji), ठाकुर जवाहरसिंह शेखावत (Jawaharji)
भारतीय स्वतन्त्रता के लिए संघर्षरत राजस्थानी योद्धाओं में शेखावाटी के सीकर संस्थान के बठोठ पाटोदा के ठाकुर डूंगरसिंह (Du...
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